March 13, 2008

Ipsita ke ghazal

ज़माने भर के घम,
या एक तेरा घम,
ये घम होगा तो कितने ना होंगे,
तेरी महफिल में लेकिन हम ना होंगे।

अगर तू इत्तेफाकन मिल भी जाए,
तेरी फुर्कत के सद्मे कम न होंगे।

Written by Bahadur Shah Zafar, says Ipsi...

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